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Bilaspur High Court: फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे हथिया ली सरकारी नौकरी, हाई कोर्ट के आदेश के बाद अफसर नहीं कर रहे जांच, अफसरों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर

Bilaspur High Court: अनुसूचित जनजाति वर्ग के फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे दर्जनों फर्जी अजजा लोग सरकारी नौकरी हथिया ली है। जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने व फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट जाति छानबीन समिति व राज्य शासन को पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया था।

बिलासपुर। 07 जून 2026| अनुसूचित जनजाति वर्ग के फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे दर्जनों फर्जी अजजा लोग सरकारी नौकरी हथिया ली है। जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने व फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट जाति छानबीन समिति व राज्य शासन को पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई होते ना देख, याचिकाकर्ता ने न्यायालीयन आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी है।

पढ़िए क्या है मामला?

याचिकाकर्ता जय श्री सिंह पुसाम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के अधिकारियों के खिलाफ न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए, अवमानना याचिका दायर कर दी है। याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका में कहा है, 17 जून 2025 को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का अफसर पालन नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र की जांच कर उचित कार्यवाही करने का निर्देश अफसरों को जारी किया था, याचिकाकर्ता ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा,कोर्ट के आदेश के बाद भी अफसरों ने जानबूझकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए। इससे कथित रूप से अपात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लाभ मिल रहा है और वह पद पर बने हुए हैं, इसके चलते वास्तिक अजजा के युवा वंचित हो रहे हैं। फर्जी लोग उनका हक मार रहे हैं।

हाई कोर्ट ने जांच व कार्रवाई के लिए तय की डेडलाइन

अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी दी गई है, पूर्व के कोर्ट के आदेश के निराकरण के संबंध में डेडलाइन तय नहीं किया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने के भीतर शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग के अफसर के सामने नए सिरे से अभ्यावेदन पेश करने का निर्देश दिया है। अभ्यावेदन प्राप्ति के चार महीने के बाद पूरे मामले की जांच कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

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