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// Jun 03, 2026

*बालोद में ‘सिस्टम’ की अग्निपरीक्षा: बड़े व्यापारियों के आगे झुकेगा प्रशासन या ‘अतिक्रमण पे चलेगा बुल्डोजर*’

 

बालोद में ‘सिस्टम’ की अग्निपरीक्षा: बड़े व्यापारियों के आगे झुकेगा प्रशासन या ‘अतिक्रमण पे चलेगा बुल्डोजर’

 

 

बालोद

बालोद शहर को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेला है। शहर की जीवन रेखा माने जाने वाले ‘सदर बाजार’ से अतिक्रमण हटाने की तैयारी अंतिम चरण में है। लेकिन, जैसे-जैसे प्रशासन की मार्किंग (निशानदेही) दुकानदारों की चौखट तक पहुँच रही है, शहर का सियासी पारा चढ़ने लगा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन का ‘पीला पंजा’ रसूख की दीवारों को ढहा पाएगा या फिर राजनीतिक दबाव में मापदंडों की बलि चढ़ा दी जाएगी?

पुराने नक्शे ने बढ़ाई धड़कनें, 12 से 40 मीटर तक है सड़क

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण किसी नए सर्वे नहीं, बल्कि राजस्व के पुराने नक्शे के आधार पर हटाया जाएगा। इस नक्शे के मुताबिक, शहर की सड़कें कई स्थानों पर 12 मीटर, कहीं 20 मीटर, तो कहीं 40 मीटर तक चौड़ी हैं। वर्तमान में रसूखदारों के कब्जे के कारण यह सड़कें सिमटकर महज कुछ फीट की गलियां बनकर रह गई हैं। यदि नक्शे के अनुरूप कार्रवाई हुई, तो कई बड़े शोरूम और रसूखदारों के पक्के निर्माण जमींदोज होने तय हैं।

नेताओं की शरण में ‘नतमस्तक’ रसूखदार

सूत्रों के हवाले से खबर है कि कार्रवाई की भनक लगते ही शहर के बड़े व्यापारियों और प्रभावशाली कब्जाधारियों ने पैंतरेबाजी शुरू कर दी है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कई दुकानदार जिले के बड़े ओहदेदार नेताओं के पास नतमस्तक होकर कार्रवाई रुकवाने की गुहार लगा रहे हैं। चर्चा है कि पर्दे के पीछे से प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि ‘खास’ लोगों के निर्माण को आंच न आए।

“जनता की मांग पर शहर के सौंदर्यीकरण और सुगम यातायात के लिए सर्वे कराया जा रहा है। नियमानुसार जो भी अतिक्रमण की जद में आएगा, उस पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।”

— दिव्या मिश्रा, कलेक्टर, बालोद

प्रशासन के सामने तीन बड़ी चुनौतियां:

साख की लड़ाई: यदि प्रशासन केवल छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई करता है और बड़ों को छोड़ देता है, तो उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।

न्यायालय का दांव: कार्रवाई से बचने के लिए कई व्यापारियों ने कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है, जिससे मामला अटकने की आशंका है।

सियासी दबाव: बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के बाद क्या प्रशासनिक अधिकारी अपने रुख पर कायम रह पाएंगे?

जाम और अव्यवस्था से त्रस्त है जनता

1 जनवरी 2012 को जिला बनने के बाद बालोद में यातायात का दबाव कई गुना बढ़ा है। सदर बाजार में दुकानदारों ने अपना सामान सड़कों तक फैला रखा है, जिससे पैदल चलना भी दूभर है। पार्किंग की जगह न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग इस मार्ग पर फंसकर रह जाते हैं। प्रशासन ने व्यापारियों को 3 दिन का समय दिया था, जो बीत चुका है। अब शहर की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

निष्कर्ष: यह कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बालोद प्रशासन के ‘इकबाल’ की परीक्षा है। शहरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के शहर की सड़कें चौड़ी होंगी।

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